नरसिंह के लिए अब शुरू हुई ओलिंपिक में जाने की जद्दोजहद

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August 2, 2016

नरसिंह यादव को नाडा से आरोपमुक्त कराने के बाद उन्हें रियो ओलिंपिक भेजने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। हालांकि ये लड़ाई उतनी ही कठिन है जितनी नरसिंह को राष्ट्रीय डोपिंग रोधक एजेंसी (नाडा) की अनुशासनात्मक समिति के सामने आरोपमुक्तकरने की थी।

इसके तहत भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) ने युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) को तो मेल के जरिये सूचित कर दिया है कि अब 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में उनके प्रतिनिधि प्रवीण राणा नहीं, बल्कि नरसिंह होंगे। लेकिन इसके लिए वैश्विक संस्था अनुमति देती है या नहीं ये देखना होगा। अगर वैश्विक संस्था उसे अनुमति दे भी देती है तो इसके बाद उसे भारतीय ओलिंपिक संघ (आइओए) के जरिये रियो ओलिंपिक आयोजन समिति से अनुमति लेनी होगी।

डब्ल्यूएफआई ने इसके लिए रियो पहुंचे भारतीय दल के प्रमुख राकेश गुप्ता से संपर्क भी साध लिया है और उन्होंने मदद का आश्वासन भी दे दिया है, लेकिन भारतीय ओलिंपिक संघ के एक अधिकारी ने कहा कि ये इतना आसान काम नहीं है। क्या हम बार-बार नाम ही बदलते रहेंगे। पहले डोप में फंसे नरसिंह की जगह 25 तारीख को प्रवीण राणा का नाम फाइनल कराया और अब राणा की जगह नरसिंह का नाम फाइनल कराना बड़ा मुश्किल होगा। ये कोई जिला स्तरीय टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि ओलिंपिक है। पहले हम मंगलवार को नाडा के पूरे फैसले को पढ़ेंगे, क्योंकि केरल में और दिल्ली में कुछ एथलीटों ने अदालत में केस डाल रखे हैं। हमने केरल और दिल्ली हाईकोर्ट में इसको लेकर हलफनामे दाखिल कर रखे हैं और हमें देखना होगा कि इस फैसले से हम उनके ही खिलाफ तो नहीं जा रहे हैं। हम अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आइओसी) के चार्टर के हिसाब से चलते हैं और उसके हिसाब से ही काम करेंगे।

वहीं, नाडा के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि निश्चित ही हम इस बारे में भी विचार करेंगे क्योंकि ये तो एथलीटों की जिंदगी का सवाल है। नाडा की अनुशासनात्मक समिति ने सोमवार को माना कि 25 जून और पांच जुलाई को हुए डोप टेस्ट में पॉजीटिव पाया जाना उनका पहला अपराध माना। साथ ही उन्होंने नरसिंह के वकील की इस बात को भी माना कि 23 और 24 जून को साई के सोनीपत सेंटर में नरसिंह के पेय पदार्थ में कुछ मिलाया गया। उन्होंने यह भी माना कि एथलीट के लिए इस पर नजर रखना संभव नहीं है और नाडा और वाडा के आर्टिकल 10.4 के तहत उन्हें सजा नहीं दी गई। नाडा के महानिदेशक ने इस समिति के फैसले के खिलाफ जाने से इन्कार किया, लेकिन कहा कि इस केस में जो भी लोग हैं वे इस फैसले के खिलाफ 21 दिन में कोर्ट ऑफ आर्बिटेशन (कैस) में जा सकते हैं।

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